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सिविल सेवाओं ( IAS / PCS ) के आवंटन में सरकार करने जा रही हैं ये बड़े बदलाव

केंद्र सरकार सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को सेवाओं के आवंटन में बड़े बदलाव करने पर विचार कर रही है। एक आधिकारिक शासनादेश के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय ने संबंधित विभागों से पूछा है कि क्या फाउंडेशन कोर्स पूरा करने के बाद सेवाओं का आवंटन किया जा सकता है।
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अधिकारियों के लिए सभी सेवाओं के फाउंडेशन कोर्स की समयसीमा तीन महीने है।

अभी, संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से कराई जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा के आधार पर उम्मीदवारों को सेवाओं का आवंटन होता है।

यह फाउंडेशन कोर्स से काफी पहले हो जाता है।

कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार, पीएमओ इस बात की पड़ताल करना चाहता है कि क्या परीक्षा से चुनकर आए परीवीक्षार्थियों को सेवाओं अथवा कैडर का आवंटन फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जा सकता है।
संबंधित विभागों से फाउंडेशन कोर्स में प्रदर्शन को उचित वेटेज देने की संभावनाओं का पता लगाने को कहा गया है। ताकि सिविल सेवा परीक्षा और फाउंडेशन कोर्स के संयुक्त अंकों के आधार पर अखिल भारतीय सेवाओं और कैडर का आवंटन किया जा सके।
कार्मिक मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) तीन अखिल भारतीय सेवाएं हैं।
विभागों से कहा गया है कि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) और भारतीय दूरसंचार सेवा (आईटीएस) जैसी दूसरी केंद्रीय सेवाओं के आवंटन से संबंधित प्रस्ताव पर अपना फीडबैक दें। यूपीएससी तीन चरण में सिविल सेवा परीक्षा पूरी कराता है, प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार। इसके परिणाम के आधार पर विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन होता है।
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संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए उम्मीदवारों को सेवा का आवंटन अभी फाउंडेशन कोर्स पूरा होने से पहले किया जाता है. कैडर नियंत्रण से जुड़े विभिन्न प्राधिकारों को कार्मिक मंत्रालय द्वारा भेजे गए पत्र के मुताबिक पीएमओ इस बारे में जानना चाहता है कि परीक्षा के आधार पर चयनित प्रोबेशनर को सेवा आवंटन / कैडर आवंटन क्या फाउंडेशन कोर्स के बाद किया जा सकता है.

पत्र के मुताबिक संबद्ध विभागों को फाउंडेशन कोर्स में प्रदर्शन को महत्व दिए जाने तथा अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को सिविल सेवा परीक्षा एवं फाउंडेशन कोर्स में प्राप्त संयुक्त अंक के आधार पर सेवा आवंटन और कैडर आवंटन करने की व्यवहार्यता की पड़ताल करने को कहा गया है.
कार्मिक मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि विभागों को भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) जैसे अन्य केंद्रीय सेवाओं के आवंटन के प्रस्ताव पर भी अपनी प्रतिक्रिया देने को कहा गया है.
बता दें कि सिविल सेवा परीक्षा के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) सहित अन्य सेवाओं के लिए चयन किया जाता रहा है..
भारतीय सेवाओं के लिए के लिए सर्विस और स्टेट कैडर आवंटन की 70 साल पुरानी व्यवस्था बदलने जा रही है। पीएमओ के सुझाव के मुताबिक सिर्फ यूपीएससी परीक्षा की रैंकिग पर ही नहीं, बल्कि तीन महीने के फाउंडेशन कोर्स के बाद ही कैंडिडेट्स के कैडर और सर्विस क्षेत्र तय किए जाएं।
अब यूपीएससी चयन और फिर तीन महीने के फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा के आधार पर ही तय होगा कि कौन आईएएस बनेगा और कौन आईपीएस।
इस फैसले का असर 24 तरह की सभी अखिल भारतीय सेवाओं पर पड़ेगा।

इस फैसले से यूपीएससी टॉपर के लिए यह जरूरी नहीं कि उसे मनपसंद सर्विस IAS, IPS या IFS मिल जाए
कार्मिक मंत्रालय ने एक पत्र लिखकर सभी कैडर-नियंत्रण प्राधिकरण और मंत्रालयों से इस पर सुझाव मांगा है।

अभी है यह व्यवस्था :

पीएमओ के मुताबिक इससे कैंडिडेट का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा और उनके मुताबिक कैडर और सेवा दी जा सकेगी। फिलहाल सिविल सर्विस एग्जाम पास करने वाले अभ्यार्थियों के लिए आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस सहित कुछ 24 सेवा क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं।

यूपीएससी परीक्षा में रैंक के आधार पर ये तय किया जाता है कि किसे कौन-सी सेवा दी जाएगी।

यूपीएससी परीक्षा में चुने जाने के बाद सभी कैंडिडेट्स को तीन महीने का फाउंडेशन कोर्स कराया जाता है। अभी तक फाउंडेशन कोर्स शुरू होने से पहले ही कैडर और सेवा क्षेत्र तय कर दिए जाते हैं।
कैडर निर्धारित होने के बाद आईएसएस और आईएफएस अभ्यार्थियों को मसूरी के लालबहादुर शास्त्री नेशनल आकादमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में फाउंडेशन कोर्स कराया जाता है, वहीं अन्य लोगों को मसूरी, हैदराबाद और भोपाल भेजा जाता है।

            यह सिर्फ एक पत्र ही नहीं है 

 बल्कि यह देश कैसे चलेगा इसकी दशा व दिशा को तय करने वाला फरमान है । इस फरमान के अनुसार अब  UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में सिर्फ रैंक से आपका सर्विस व सर्विस क्षेत्र तय नहीं होगा, अपितु लाबासना , मसूरी में 3 माह के ट्रेनिंग के बाद किये गए परफॉर्मेंस के अंक को भी जोड़ा जाएगा ।
इस सुधार के माध्यम को न्यायोचित ठहराने के लिए कहा जा रहा है कि इससे यह पता चल पाएगा कि कौन सिलेक्टेड अभ्यर्थी किस सेवा व सेवा क्षेत्र के लिए उपयुक्त है ।

       अब इसमें जो होगा , वो सुन लीजिए -

होगा यह कि अब आप सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बाद मसूरी की ट्रेनिंग कीजिये । फिर जिसकी केंद्र में सरकार होगी, वो अपनी राजनीतिक दल की विचारधारा के अनुसार अफसर को अपने मनमाफिक सेवा व सेवा क्षेत्र देने के लिए भरपूर हस्तक्षेप करेगा । साथ ही साथ राजनीतिक हस्तक्षेप, अमीर-पूंजीपतियों के दुलारो का हस्तक्षेप, बड़े- बड़े अफसरों का हस्तक्षेप बढ़ेगा । क्योंकि इनके लोग आसानी से अच्छी जगह सेवा क्षेत्र ले लेंगे और गरीब - दलित-पिछड़ा- अल्पसंख्यक व हिंदी भाषा-भाषी लोग अपनी बारी का इंतज़ार करता रहेगा ।   

इन सब के साथ - साथ इस ट्रेनिंग सेंटर पर चापलूसी की एक परम्परा की भी शुरुआत हो जाएगी । लोग अपने ट्रेनर को खुश रखने के लिए पता नहीं क्या - क्या करेंगे । क्योंकि इन्ही ट्रेनर के हाथ मे इनका भविष्य होगा ।

सबसे बड़ी बात, जो लोग अभी तक खुशनुमा माहौल में ट्रेनिंग किया करते थे , वे एकदूसरे को पीछे छोड़ने की तरकीब सोचने लगेंगे ।
कुल मिलाकर, भारतीय सिविल सेवा में वर्तमान सरकार अपनी राजनीतिक पार्टी व आरएसएस के विचारधारा के लोगो को अपने अनुसार सेवा व सेवा क्ष्रेत्र देना चाहती है । जिससे की वो आने वाले समय मे भारतीय प्रशासनिक सेवा पर वैचारिक कब्जा कर सके । यह प्रशासकों को खुले तौर पर भारतीय संविधान के तहत नहीं, अपितु किसी खास विचारधारा के पोषक के तौर में पेश करना चाहती है ।
यदि ऐसा होता है तो फिर समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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