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Sukanya Samridh Yojana || सुकन्या समृद्धि योजना

सुकन्या समृद्धि योजना के बारे में जानिए हर बात

यह खाता 250 रुपये से खुल जाता है. पहले इसके लिए 1,000 रुपये जमा करने पड़ते थे.
सुकन्या समृद्धि योजना छोटी बचत स्कीम है. 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत इसे शुरू किया गया था. यह स्कीम बेटियों की शिक्षा और उनके शादी-ब्याह के लिए रकम जुटाने में मदद करती है. अभी स्कीम के तहत 8.1 फीसदी ब्याज मिलता है. सेक्शन80 सी के तहत इस योजना में निवेश करने पर टैक्स छूट भी मिलती है. यानी सालाना 1.5 लाख रुपये का निवेश पर आप टैक्स छूट का फायदा उठा सकते हैं. स्कीम से मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स फ्री है.
बेटी की उम्र 10 साल होने से पहले कभी भी सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया जा सकता है. यह खाता 250 रुपये से खुल जाता है. पहले इसके लिए 1,000 रुपये जमा करने पड़ते थे. किसी भी वित्त वर्ष में इसमें अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं.
खाता किसी भी पोस्ट ऑफिस या बैंक की शाखा में खुलवाया जा सकता है. खाता खुलने के 21 साल तक इसे चालू रखा जा सकता है. माता-पिता चाहें तो 18 साल की उम्र में बेटी की शादी होने तक इसे चला सकते हैं.

बेटी के 18 साल का हो जाने पर उसकी उच्च शिक्षा के लिए खाते से 50 फीसदी तक रकम निकाली जा सकती है.

क्या हैं सुकन्या समृद्धि खाता खोलने के नियम?

यह खाता बेटी के माता-पिता या कानूनी अभिभावक उसके नाम से खुलवा सकते हैं. इसे बेटी के जन्म से उसके 10 साल का होने तक खुलवाया जा सकता है. नियमों के मुताबिक, एक बच्ची के लिए एक ही खाता खोला जा सकता है और उसमें पैसा जमा किया जा सकता है. यानी एक बच्ची के लिए दो खाते नहीं खोले जा सकते हैं.

खाता खुलवाते समय बेटी का बर्थ सर्टिफिकेट पोस्ट ऑफिस या बैंक में देना जरूरी है. इसके साथ ही बेटी और अभिभावक के पहचान और पते का प्रमाण भी देना पड़ता है.

कितनी रकम जमा कर सकते हैं?
खाता खुलवाने के लिए 250 रुपये काफी हैं. बाद में 100 रुपये के गुणक (मल्टीपल) में पैसे जमा कराए जा सकते हैं. किसी एक वित्त वर्ष में कम से कम 250 रुपये जरूर जमा करने पड़ते हैं. इसी तरह एक बार या कई बार में अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही जमा कराए जा सकते हैं.
खाता खुलने के दिन से 15 साल तक पैसे जमा कर सकते हैं. 9 साल की बेटी के मामले में उसके 24 साल का हो जाने तक पैसे जमा कराए जा सकते हैं. बेटी के 24 से 30 साल के होने तक खाते में जमा रकम पर ब्याज मिलता रहता है.

खाते में न्यूनतम जमा न होने पर वह अनियमित हो जाता है. इसे 50 रुपये सालाना की पेनाल्टी देकर नियमित कराया जा सकता है. इसके साथ ही हर साल के लिए कम से कम जमा कराई जाने वाली रकम भी खाते में डालनी पड़ेगी.

पेनाल्टी न चुकाने पर खाते में जमा रकम पर पोस्ट ऑफिस के सेविंग अकाउंट के बराबर ब्याज मिलेगा. यह अभी करीब 4 फीसदी है. अगर खाते पर ब्याज ज्यादा चुका दिया गया है तो उसे रिवाइज किया जा सकता है.

खाते में कैसे जमा होती है रकम?
खाते में कैश, चेक, डिमांड ड्राफ्ट या ऐसे किसी इंस्ट्रूमेंट से रकम जमा कर सकते हैं जिसे बैंक स्वीकार करता हो. इसके लिए पैसे जमा करने वाले और खाताधारक का नाम लिखना जरूरी है.
खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर मोड से भी पैसे जमा कर सकते हैं. शर्त यह है कि उस पोस्ट ऑफिस या बैंक में कोर बैंकिंग सिस्टम मौजूद हो. अगर खाते में चेक या ड्राफ्ट से पैसे जमा किए जाते हैं तो क्लियर होने के बाद से उस पर ब्याज दिया जाएगा. जबकि ई-ट्रांसफर के मामले में डिपॉजिट के दिन से यह कैलकुलेशन होगा.

कैसे कैलकुलेट होता है ब्याज?
सरकारी बॉन्ड की यील्ड के आधार पर हर तिमाही सरकार ब्याज दर तय करती है. खाते पर ब्याज दर सरकारी बॉन्ड की तुलना में 0.75 फीसदी तक अधिक होता है.

इस स्कीम में अब तक दिया गया ब्याज
1 अप्रैल, 2014: 9.1%
1 अप्रैल, 2015: 9.2%
1 अप्रैल, 2016 -30 जून, 2016: 8.6%
1 जुलाई, 2016 -30 सितंबर, 2016: 8.6%
1 अक्टूबर, 2016-31 दिसंबर, 2016 : 8.5%
1 जुलाई, 2017-31 दिसंबर, 2017 : 8.3%
1 जनवरी, 2018- 31 मार्च, 2018 : 8.1%
1 अप्रैल, 2018 - 30 जून, 2018 : 8.1%
1 जुलाई, 2018 - 30 सितंबर, 2018 : 8.1%
1 अक्टूबर, 2018 - 31 दिसंबर, 2018 : 8.5%
1 जनवरी 2019 - 31 मार्च, 2019 : 8.5%

किन स्थितियों में समय से पहले बंद हो जाता है खाता?
खाताधारक की मौत हो जाने पर मृत्यु प्रमाणपत्र दिखाकर खाता बंद कराया जा सकता है. इसके बाद खाते में जमा रकम बेटी के अभिभावक को ब्याज सहित वापस दी जाएगी.
इसके अलावा खाता खुलने से पांच साल के बाद इसे बंद किया जा सकता है. यह भी खास स्थितियों में किया जा सकता है. मसलन किसी जानलेवा बीमारी के मामले में. इसके बाद भी अगर किसी दूसरे कारण से खाता बंद किया जाता है तो इसकी इजाजत है. लेकिन, तब ब्याज सेविंग अकाउंट के हिसाब से मिलेगा.

क्या खाता ट्रांसफर हो सकता है?
जी, यह संभव है. अकाउंट देशभर में कहीं भी ट्रांसफर हो सकता है. शर्त यह है कि जिस बेटी के नाम से खाता खुला है वह एक जगह से कहीं और शिफ्ट हो रही है.

ट्रांसफर में कोई फीस नहीं लगती है. इसके लिए अकाउंट होल्डर या उसके माता-पिता/अभिभावक के शिफ्ट होने का सबूत दिखाना पड़ता है.
अगर इस तरह का कोई सबूत नहीं दिखाया गया तो अकाउंट ट्रांसफर के लिए पोस्ट ऑफिस या बैंक को 100 रुपये फीस चुकानी पड़ेगा जहां खाता खोला गया है.

खाते से आंशिक निकासी के नियम क्‍या हैं?
खाताधारक की वित्तीय जरूरतें पूरी करने के लिए खाते से आंशिक निकासी की जा सकती है. इनमें उच्च शिक्षा और शादी जैसे काम शामिल हैं. इसमें खाते में पिछले वित्त वर्ष के अंत तक जमा रकम का 50 फीसदी निकाला जा सकता है. खाते से यह निकासी तभी संभव है, यदि अकाउंट होल्डर 18 साल की उम्र पार कर ले.

अकाउंट से रकम निकालने के लिए एक लिखित आवेदन और किसी शैक्षणिक संस्थान में एडमिशन ऑफर या फीस स्लिप की जरूरत होती है.
क्या NRI बेटी के नाम से खाता खुलवा सकते हैं?
स्कीम का लाभ सिर्फ भारत में रहने वाली बेटियों को ही मिलता है. यानी अनिवासी भारतीय यह खाता नहीं खुलवा सकते हैं. हालांकि, स्कीम की अवधि के दौरान यदि बेटी की नागरिकता बदलती है तो उसी दिन से खाते पर ब्याज मिलना बंद हो जाएगा जिस दिन से नागरिकता के दर्जे में बदलाव होगा.
स्कीम में टैक्स बेनिफिट क्या हैं?
इस स्कीम को एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट-एक्जेम्प्ट का दर्जा प्राप्त है. यानी इसमें किए जाने वाले निवेश पर टैक्स छूट के साथ इससे मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स फ्री होता है.

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