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योगी सरकार ने की घोषणा: प्रवासी मजदूरों के लिए बने माइग्रेशन कमीशन का नाम होगा कामगार श्रमिक कल्याण आयोग

योगी सरकार करेगी श्रमिक आयोग का गठन, 30 लाख को मिलेगा रोज़गार

योगी सरकार ने की घोषणा: प्रवासी मजदूरों के लिए बने माइग्रेशन कमीशन का नाम होगा कामगार श्रमिक कल्याण आयोग

Uttar Pradesh Workers Welfare Commission Will Be Named Migration Commission ...

UP में माइग्रेशन कमीशन का होगा गठन, श्रमिक कल्याण आयोग होगा नाम : अवनीश अवस्थी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि यूपी और अन्य राज्यों में प्रदेश के कामगारों एवं श्रमिकों को सेवायोजित करने के लिए बनने वाले माइग्रेशन कमीशन का नाम कामगार श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) कल्याण आयोग होगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कोविड-19 की वैश्विक महामारी के कारण अन्य राज्यों से लौटने वाले 25 लाख से अधिक श्रमिकों काे सामाजिक सुरक्षा के साथ रोज़गार उपलब्ध कराने के वास्ते राज्य सरकार एक श्रमिक आयोग का गठन करेगी।

अपर मुख्य सचिव (गृह एवं सूचना) अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बैठक में कामगारों एवं श्रमिकों की विभिन्न प्रदेशों से वापसी की समीक्षा की। उन्होंने आदेश दिया कि माइग्रेशन कमीशन का नाम कामगार श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) कल्याण आयोग रखा जाए। उन्होंने बताया कि यह आयोग श्रमिकों एवं कामगारों के सेवायोजन, रोजगार, स्किल मैपिंग और कौशल विकास के क्षेत्र में आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखेगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि एक दो दिन में आयोग के गठन की कार्रवाई सुनिश्चित कर ली जाए। योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जल्द ही उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में प्रदेश के कामगारों और श्रमिकों को सेवायोजित करने के लिए एक 'माइग्रेशन कमीशन गठित किया जाएगा।

 यह आयोग श्रमिकों को बीमा आदि हर प्रकार की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराएगा।

योगी ने कहा कि इसके तहत उत्तर प्रदेश के सभी कामगारों एवं श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा की गारंटी भी दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा, उत्तर प्रदेश में अब तक जितनी भी मैन पॉवर (श्रम शक्ति) हमारे पास है। प्रदेश सरकार इसकी स्किल मैंपिंग करा रही है। जिसके बाद इनके व्यापक स्तर पर रोजगार उत्तर प्रदेश में ही उपलब्ध कराने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे में अगर किसी राज्य को मैन पावर की आवश्यकता होगी तो उनकी मांग पर सामाजिक सुरक्षा की गारंटी राज्य सरकार देगी, बीमा कराएगी और श्रमिक एवं कामगार को हर तरह की सुरक्षा देगी। इसके साथ ही कोई भी राज्य सरकार बिना अनुमति के उत्तर प्रदेश के लोगों को श्रमिक व कामगार के रूप में लेकर नहीं जाएगी।

कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन है. देश का सबसे बड़ा सूबा भी कोरोना वायरस से लगातार लड़ रहा है. अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश में कोरोना के हालातों पर के बारे में बताया |

योगी आदित्यनाथ ने यहां पांचजन्य एवं ऑर्गनाइज़र द्वारा आयोजित एक वेबिनार में शिरकत करते हुए यह घोषणा की। कोविड-19 सजगता से सफलता विषय पर आधारित इस परिचर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संकट बाद उत्तर प्रदेश में अब तक 22 लाख से अधिक प्रवासी श्रमिक विभिन्न राज्यों से लौट चुके हैं।

अगले सात दिनों में करीब करीब वे लोग भी लौट आएँगे जो लौटने का मन बना चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी श्रमिक उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और उनके हित की चिंता करना उत्तर प्रदेश की सरकार की जिम्मेदारी है। वेबिनार का संचालन पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने किया। ऑर्गनाइज़र के संपादक प्रफुल्ल केतकर तथा देश भर के 20 से अधिक बड़े पत्रकार इसमें शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रवासी श्रमिकाें के गृह जनपद पहुंचने पर उन्हें क्वारंटीन केन्द्रों पर भेज रही है और वहां उनके उपचार का प्रबंध करने के साथ ही स्किल मैपिंग यानी उनके कौशल आदि की जानकारी दर्ज कर रही है। इन श्रमिकों को अलग अलग क्षेत्रों में काम करने का हुनर है। वस्त्र उद्योग, राजमिस्त्री, नलसाज़ आदि अनेक प्रकार के काम आते हैं। राज्य सरकार ने फैसला किया है कि इन श्रमिकों के लिए एक श्रमिक आयोग का गठन किया जाएगा।

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